बीटीसी प्रवेश की उम्र बढ़ाने पर कहीं खुशी, कहीं गम मैनपुरी: सरकार के बीटीसी प्रवेश में पांच वर्ष की उम्र बढ़ाने के आदेश से आवेदकों के चेहरे पर कहीं खुशी कहीं गम दिखाई दी। 30 से ऊपर उम्र के बेरोजगार सत्ता की जय-जयकार कर रहे हैं। वहीं 30 से कम उम्र वाले अभ्यर्थी इस फैसले से कतई खुश नहीं हैं। किसी ने सरकार के इस निर्णय को छलावा बताया तो कोई इसे बेहतर बताने की बात कर रहा है। प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रहे ऋषि मिश्रा कहते है कि सरकार ने बीटीसी में प्रवेश की उम्र 30 से बढ़ाकर 35 करना अच्छा है। इससे तमाम बेरोजगारों को नौकरी के अवसर मिलेंगे। ओवरऐज होने वाले आवेदकों के लिए अच्छा निर्णय है। कोचिंग सेंटर संचालक चंद्रप्रकाश शाक्य कहते हैं कि सरकार केवल आदेश जारी कर रही है बेरोजगारों को नियुक्ति के नाम पर केवल आवेदन मांगे जाते हैं। उसके बाद भर्ती टाल दी जाती है। आखिर सरकार बेरोजगारों के साथ इस तरह का छलावा क्यों कर रही है। जब सरकार को नियुक्ति करनी ही नहीं है तो इस तरह की उम्र बढ़ाने घटाने से वह आखिर बेरोजगारों के मन में सरकार के प्रति सकारात्मक रूख बनाये रखने का प्रयास कर रही है। बीएड बेरोजगार कमल मिश्र कहते हैं कि दो वर्षो में प्रदेश सरकार ने उर्दू शिक्षक छोड़कर शिक्षा विभाग में एक भी शिक्षक को नौकरी नहीं दी है। प्राथमिक विद्यालयों में 72 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्तियां होनी हैं। लेकिन सरकार जानबूझकर इन नियुक्तियों को लटकाने का काम कर रही है। बेरोजगार भटक रहा है और सरकार केवल फरमान जारी कर रही है। प्राइवेट शिक्षक अरविंद यादव कहते हैं कि बीटीसी प्रवेश में पांच वर्ष की छूट देना बेरोजगारों को रिझाने का एक नाटक हैं। इससे बेरोजगारों की भीड़ और ज्यादा बढ़ेगी व लोग नौकरी की आस में भटकते रहेंगे। सरकार बेरोजगारों को रोजगार नहीं बल्कि और अधिक बेरोजगारी फैलाने के लिए इस तरह के आदेश दे रही है, उम्र बढ़ाना कतई उचित नहीं है।

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